मूलांक ३ शक्ति, साहस और दृढ़ता का प्रतीक है । यह श्रम का ठोस प्रतिष्ठापक तथा संघर्ष का जीवन्त एवं मूर्तिमन्त रूप है । इसलिये जीवन-संघर्ष में जितना यह मूलांक सफल होता है, उतना अन्य नहीं ।
प्रतिनिधि ग्रह – मूलांक ३ का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है, जो कि साहस, श्रम और शक्ति के अतिरिक्त विद्या, ज्ञान एवं धर्म का भी सूचक है, अतः ऐसे व्यक्ति हृदय से धार्मिक प्रकृति प्रधान होते हैं परन्तु इनका धर्म रूढ़िवादिता से ग्रस्त नहीं होता, अपितु लचीला एवं सर्वसुखकर होता है ।
हाथ में तर्जनी अंगुली के मूल में इसका निवास-स्थान है तथा एक राशि पर इसकी स्थिति १३ मास तक रहती है। गोचरावस्था में जब- जब भी बृहस्पति सूर्य के सम्पर्क में भाता है अथवा उससे ग्रस्त एवं प्रस्त होता है तब-तब तीन मूलांक वाले व्यक्तियों के जीवन में कम- जोरी एवं असफलताओं का प्रवेश होता है। आकाश में जब-जब वृहस्पति क्षीण होगा, इनका जीवन भी धूमिल होगा और व्यक्तित्व में क्षीणता आयेगी ।
उन्नत समय – १६ फरवरी से २० मार्च तथा २१ नवम्बर से २० दिसम्बर तक के समय में वृहस्पति प्रबल एवं श्रेष्ठ होता है, अतः यह समय श्रेष्ठ, उन्नत एवं लाभयुक्त होता है। नया कार्य, व्यव- साय, नई यात्रा, नये सम्बन्ध तथा रोजगार आदि इसी समय में प्रारम्भ करें तो अधिक उपयुक्त एवं सही सिद्ध हो सकते हैं, अतः नई योजनाओं का श्रीगणेश इन्हीं दिनों में करें।
शुभ तिथियाँ- प्रत्येक महीने की ३, १२ एवं २१ तारीख आपके लिए श्रेयष्कर रहेंगी । इसी प्रकार मार्च, जून तथा दिसम्बर का महीना भी श्रेयष्कर रहेगा । अपने से उच्च अधिकारियों से इन्हीं तारीखों को मिलें, भाप किसी को भी पत्र लिखें तो इस प्रकार से समय का खयाल करके पत्र लिखें कि इन्हीं तारीखों में से किसी तारीख को वह पत्र अधिकारी को मिले । अपने मित्र तथा सहयोगी भी ऐसे ही बनाव, जिनका मूलांक ३ हो ।
अशुभ तिथियाँ-– १ तथा ७ का अंक आपके लिए दुःखदायी तथा अशुभ सूचक है। राज्य सम्बन्धी अशुभ सूचना ७, १६, २५ तारीखों को ही प्राप्त होगी । धार्थिक दृष्टि से जरवरी तथा जुलाई कष्टकर है।
शुभ दिवस – चन्द्रवार तथा गुरुवार आपके लिए शुभ हैं, अन्य वारों का फल निम्न प्रकारेण है :
१. रविवार असफलतासूचक, व्यर्थ वाद-विवाद, हानि, व्यर्थ का भ्रमण, अशुभ समाचार तथा राज्य कार्य के लिए
हानिदायक ।
२. सोमवार — धन लाभ, मित्रों की संगति, निरोगिता तथा शुभ समाचार, राज्य कार्य के लिए श्रेयष्कर ।
३. मंगलवार – मनसन्ताप, मानसिक परेशानी, दिल में हूक उठना, उदासी ।
४. बुधवार — धन लाभ, लेखन, कार्यसिद्धि तथा नूतन समाचार । ५. गुरुवार – शुभ समाचार सम्बन्धियों के बारे में विशेष समाचार, पत्नी अथवा ससुराल से लाभ, राज्यकार्य में शुभ समाचारों से युक्त । ६. शुक्रवार – ऐश-आराम, भोग-विलास, नये वस्त्र – श्राभूषण खरीदना, प्रेमी अथवा प्रेमिका से मिलन, रतिसुख, लाभ ।
७. शनिवार- श्रेष्ठ धन लाभ, भाग्योदयसूचक, विशेष हर्ष समाचार
तथा सुखदायक ।
शुभ रंग– पीला रंग आपके लिये सौभाग्यसूचक है। बैंगनी रंग, नीला तथा गुलाबी रंग भी आपके लिये अनुकूल तथा शुभ फलदायक है। जहाँ तक हो सके श्राप अपनी जेब में पीले रंग का रूमाल रखें। यदि ड्राइंगरूम में बैंगनी रंग के पर्दे तथा चादर रक्खें अथवा तकिये की खोली इस रंग की बनायें तो आपके लिये श्री एवं सम्पनता पूर्ण रहेगी।
शुभ रत्न- आपके लिए प्रधान रत्न पुखराज है । इसे संस्कृत में पुष्पराग, हिन्दी में पुषराज या पुष्पराज अथवा पुखराज, फारसी में जर्द याकूत तथा अंग्रेजी में टोपे (Topay) कहते हैं । यह मुख्यतः रंगों में पाया जाता है-
(i) हल्दी के रंग के समान जर्द
(ii) केशर के समान केशरिया
(iii) नींबू के छिलके के समान (iv) स्वर्ण के रंग के समान
(v) सफेद, पर पानी भाई-सी लिये हुए।
परन्तु आपके लिये पीला पुखराज ही श्रेयस्कर है, जो स्वर्ण के समान कांतियुक्त तथा सुडौल है । यह तीन रत्ती से छोटा न हो । स्वर्ण अंगूठी में जड़वा कर अंगूठी को तर्जनी उंगली में धारण करना चाहिए। अंगूठी में पुखराज इस प्रकार से जड़ा हुआ हो कि वह अंगूठी को सदा स्पर्श करता रहे। ऐसी अंगूठी गुरु-पुष्य को ही बनवावें तथा उसी दिन
इसे धारण कर लें ।
देवता – श्रापका प्रधान ग्रह विष्णु है, अतः आप विष्णु की ही सतत् उपासना कर तथा सत्यनारायण का व्रत रक्खें । नित्य प्रातःकाल विष्णु के चित्र अथवा उनकी मूर्ति के दर्शन कर फिर अन्य कार्यों में लगें तो श्रेयस्कर रहेगा ।
ध्यान – प्रातः काल उठकर आप बृहस्पति का इस प्रकार ध्यान करें: तेजोमयं शक्ति त्रिशूल हस्तं
सुरेन्द्र सं सेवित पद पद्मम् । मेधानिधि जानुगत द्वि बाहु गुरु स्मरे मानस पंकजेऽहम् ॥
मन्त्र – जब-जब भी आप परेशानी में हों अथवा किसी प्रकार का संकट श्राप पर मँडरा रहा हो या किसी दुर्घटना या अशुभ की शंका हो तो धाप निम्न मंत्र का जप करें, निश्चय ही आप अपने कार्य में सिद्धि
प्राप्त करेंगे ।
॥ ॐ बृं बृहस्पतये नमः ॥
की वृद्धि करता है । स्नायविक शैथिल्य तथा चित्त में विकलता हरदम
शारीरिक स्वास्थ्य – बृहस्पति क्षीण एवं प्रशुभ होने पर धर्मरोग बनी रहेगी, गुप्तेन्द्रिय शिथिल होगी तथा कामवासना का प्राबल्य रहेगा। रक्त-सम्बन्धी बीमारियाँ तथा वायु के प्रकोप के प्रति जागरूकता बरतें।हृदय रोग वृद्धावस्था में कष्ट देगा, स्वादिष्ट पदार्थों का सेवन एवं उनके प्रति रुचि, हर समय कुछ-न-कुछ खाते रहने की प्रवृत्ति, चर्बी एवं स्थूलता में वृद्धि, प्रमेह, सैप्टिक, पित्तज्वर, पित्त प्रकोप, उदर शूल आदि बने रहेंगे । पेट सम्बन्धी परेशानी भी बनी रहेगी । यदि आप असावधानी बरतेंगे तो कामला, खुजली, त्वचारोग, सन्निपात, कुकरखाँसी श्रादि तुरन्त हो जायेंगे, अतः आपको इनकी श्रोर से पूरी सावधानी बरतना चाहिए।
व्रतोपावस – श्राप पूर्णिमा का व्रत करें तथा यदि बीमार हों तो गुरुवार को भोजन न करें। गुरुवार को ही ‘विष्णु सहस्रनाम’ पाठ भी श्रापके लिए आनन्द रह सकता है।
मित्रता – आपका स्नेह सम्बन्ध ऐसे ही व्यक्ति या स्त्रियों से हो सकता है जिनका मूलांक ३ है, अतः आप भागीदारी, व्यवसाय, मित्रता, प्रेम आदि करते समय इस बात का ध्यान रक्खें । ३ मूलांक वाले व्यक्ति आपके लिए सहायक रहेंगे । ३ के अतिरिक्त जिन पुरुषों या स्त्रियों का जन्म ६, ९, १५, १८, २४, २७ तारीख को हुआ है, वे भी भ्रापके लिए अच्छ मित्र सिद्ध हो सकते हैं ।
रोमांस – जिनका जन्म १९ फरवरी से २१ मार्च तथा २१ नवम्बर से २१ दिसम्बर के बीच हुआ है, ऐसे व्यक्ति या स्त्रियाँ एवं जिनका मूलांक भी ३ हो, ये श्रापके राज में शीघ्र ही शरीक हो सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों से श्राप शीघ्र ही घनिष्टता बढ़ाने में सफल होंगे ।
सावधानियाँ – १. श्राप भोजन करते समय पूरा-पूरा खयाल रक्खें
तथा कभी भूलकर भी अधिक भोजन न करें ।
२. चर्बीयुक्त पदार्थों के सेवन से बचें।
३. गरिष्ठ भोजन आपके स्वास्थ्य एवं प्रवृत्ति के अनुकूल नहीं है,
अतः इस ओर ध्यान दें ।
४. गन्धकयुक्त पदार्थ आपके स्वास्थ्य के लिए ठीक है । ५. फलों का अधिकाधिक सेवन करें ।
६. मिर्चों तथा जलनशील पदार्थों से यथासंभव बचें ।
आपकी विशेषतायें – १. अपने विचार, अपनी भावनाएँ और अपने आत्म को जितने सुन्दर तरीके से आप व्यक्त कर सकते हैं, उतना अन्य कोई नहीं । दूसरे व्यक्तियों को प्रभावित करना और उनसे काम निकालना आप खूब समझते हैं ।
२. द्रव्य प्रापके पास आता अवश्य है, पर वह टिकता नहीं । जब आपके पास द्रव्य आता है, तब आप भविष्य की चिन्ता तो एक प्रकार से छोड़ ही देते हैं, परन्तु धनाभाव की स्थिति में आप निराश और हतोत्साह भी जल्दी हो जाते हैं ।
३. स्वार्थ की भावना आप में कुछ विशेष है । काम होने पर आप विरोधी के भी तलवे सहलाने को तैयार हैं, परन्तु काम निकल जाने पर उसे छिटकाते भी देर नहीं लगाते ।
४. व्यय विशेष रहेगा, विशेषतः ऐश-आराम, मौज-शौक आदि तथा सजावट की वस्तुनों पर आप अधिक व्यय करेंगे ।
५. आपकी महत्वाकांक्षाएँ बढ़ी चढ़ी रहती हैं। छोटा पद, छोटा कोष, छोटा कार्य श्रापको पसन्द नहीं । ज्यों-ज्यों श्राप उच्चपदस्थ व्यक्तित्व देखते हैं, आप भी उसके समान बनने का प्रयत्न करते हैं। महत्वाकांक्षा हर समय ऊँची से ऊँची बढ़ी चढ़ी ही रहती है।
६. पाप अधिकतर निराशा-सी ही अनुभव करेंगे, क्योंकि आप उच्च महत्वाकांक्षा के फलस्वरूप जिस पद या प्रतिष्ठा को पाना चाहते हैं, वह प्राप्त न होने पर निराश होना स्वाभाविक ही है।
७. आकस्मिक द्रव्य लाभ श्रथवा श्राकस्मिक उन्नति की आप कामना तो करेंगे, पर सतर्क न रहते पर वह संभव नहीं होगा । प्राप सामाजिक पद मर्यादा की ओर सदैव जागरूक रहेंगे ।
८. भाइयों से विशेष लाभ नहीं होगा, यद्यपि आपके स्वभाव के कारण वैमनस्य तो नहीं बढ़ेगा, परन्तु फिर भी मनमुटाव-सा अवश्य
बना रहेगा ।
9. भाप जरा-सा भी पद या पैसा प्राप्त हो जाने पर स्वेच्छा- चारिता की भोर बढ़ने लग जाते हैं, यह ठीक नहीं हैं, क्योंकि स्वेच्छा- चारिता ही प्रापके व्यक्तित्व को धूमिल बनाती है, इसी स्वेच्छाचारित के कारण आपके शत्रु बनते हैं, मित्रों में परस्पर मनमुटाव बढ़ता है तथा एकान्तता बढ़ती है।
१०. आप किसीके कार्य संचालन में न तो बाधा डालते हैं श्री र न यह चाहते ही हैं कि कोई आपके कार्यों में हस्तक्षेप अथवा किसी प्रकार का व्यवधान उपस्थित करे ।
११. श्राप बुद्धिमान, ईमानदार एवं उदार हृदय है तथा सरल जीवन बिताने के इच्छुक हैं, परन्तु गलत तरीके से पैसा आता हो तो श्राप मना भी नहीं करते, परन्तु बाद में श्राप पश्चात्ताप भी करते हैं।
१२. क्रोध शीघ्र श्रा जाता है, परन्तु जितनी शीघ्रता से आता है, उतनी ही शीघ्रता से वह उतर भी जाता है, क्रोधातिरेक में भी आप विवेक को अपने हाथ से नहीं जाने देते ।
१३. जल्दी बोलना, अखण्डित तर्क प्रस्तुत करना तथा अपनी वाणी से दूसरों को वश में कर लेना आपकी विशेषता कही जा सकती है ।
१४. आप सदैव अर्थोत्पन्न के लिए एक से अधिक काम साथ में रखते हैं, परन्तु संतुलन नहीं कर पाते, इसलिए यंदाकदा अव्यवस्था संभव है ।
१५. आपके मित्र तो कई होंगे, लेकिन मित्र आपसे विश्वासघात ही करेंगे, अतः इस ओर से पूरी सावधानी बरतें ।
।
१६. प्रेम के क्षेत्र में अधिकांशतः आपको असफलता का ही सामना करना पड़ता है । यद्यपि श्राप इस ओर प्रयत्नशील रहते हैं, एवं कुछ लाभ उठा भी लेते हैं, परन्तु सफलता के ठीक पहले कुछ न कुछ ऐसा गड़बड़ा जाता है कि आप सफलता को छूते-छूते रह जाते हैं ।
१७. आपकी पत्नी सुन्दर, सुशील एवं प्राज्ञाकारिणी होगी तथा पत्नी के कारण आप निश्चितता-सी अनुभव करेंगे 1
१८. बाल्यावस्था सामान्य ढंग से ही व्यतीत होगी, लेकिन शिक्षा के लिए कई जगह भटकना पड़ा होगा ।
१9. बाल्यावस्था में न तो गार्थिक सन्तुष्टि रही होगी और न परिवार से कोई विशेष मदद ही मिली होगी ।
२०. आापको घुड़सवारी, सुडौल शरीर, सरकारी नौकरी ही अधिक प्रिय हैं। उच्चाधिकारी होते हुए भी धाप नपे-तुले जीवन से बंधे रहना चाहते हैं ।
२१. यात्राएँ आपके जीवन में है तथा इन यात्राओं से भापको लाभ भी होगा । आप जब-जब भी थकावट अनुभव करें, यात्राएँ कर लिया करें, इससे आपका साहस द्विगुणित होगा तथा आप नये-नये अनुभव प्राप्त करने में सक्षम होंगे ।
२२. भाप यदि उन्नति करना चाहते हैं तो सम्पर्क के द्वारा ही कर सकते हैं और आपका सम्पर्क ऊँचे-ऊँचे अधिकारियों तथा विशिष्ट व्यक्तियों से होगा भी ।
२३. अनुशासन के क्षेत्र में श्राप कठोर रहेंगे । स्वयं धनुशासन- प्रिय होंगे तथा यह चाहेंगे कि आपके अधीनस्थ कर्मचारी एवं परिजन भी आपकी ही तरह अनुशासन के नियमों का पालन करें ।
२४. आपकी प्रजाविका का साधन निम्न में से एक या एका- धिक होगा – तर्कप्रधान या कानून का कार्य, प्रोफेसर, लेक्चरार, शिक्षक, समाज सुधारक, वक्ता या ऐसा ही कोई कार्य जो बोलकर शिक्षा प्रदाता हो । प्रशासन से संबंधित कार्य, छापाखाना, पत्रिका निकालना, प्रकाशन अथवा लेखना कार्य, व्यापारिक कार्य, शेयरमार्केट संगठन, नेतृत्व या कर्मठ कार्य, श्रन्वेषण, अनुसंधान तथा शोध कार्य, पुरातत्व प्रेम, राजनीति, प्रौद्योगिक केन्द्र, देव-मन्दिर से संबंधित पुजारी, मंत्र-वाहक अथवा धार्मिक कार्य प्रादि-श्रादि ।
२५. बालावल्या में यश की मात्रा कम ही रहेगी, परन्तु जीवन के प्रौढ़ावस्था में जाते-जाते श्राप पूर्णतः यशोभागी होंगे तथा कुछ ऐसा कार्य कर सकने में सक्षम होंगे, जिससे आपकी कीर्ति फैले तथा
यशलाभ हो ।
२६. गहरी निद्रा, स्वादिष्ट भोजनप्रियता, कठोर परिश्रम, सजा- बट सम्पन्न भवन, आराम आदि श्रापके जीवन की विशेषताएँ कही जा
सकती हैं ।
२७. वाहन गुख छत्तीसवें वर्ष के पश्चात प्राप्त हो जाने की पूरी आशा है।
चेतावनी– १. झाप हद से ज्यादा व्यय कर. की ओर प्रवृत्त न हों, इससे आप अधिक असन्तुलन में उलझ जायेंगे :
२. दूसरों से न तो डाह करें और न उनका वैभव देखकर दुःखी हों, अत्यधिक शीघ्रता से न तो धाप लखपति हो सकते हैं और न
विद्वान |
३. आप कुछ न कुछ संचय करते रहिए, अन्यथा समय पड़ने पर श्राप अपने आपको अकेला ही महसूस करेंगे।
४. ईर्ष्या मत कीजिये, यह प्रापके व्यक्तित्व का घोर शत्रु हैं। ५. आप अपने रहन-सहन के स्तर को गिरने मत दीजिए, हल्की संगति भी मत कीजिये ।
शुभवर्ष – आपके जीवन के ३, १२, २१, ३०, ३३, ३६, ४६, ५७, ६६, ७५ और ८४वें वर्ष प्रत्युत्तम जायेंगे। इसके अतिरिक्त दे सभी वर्ष प्रापके जीवन में श्रेष्ठ रहने चाहिए जो ३ के अंक से विभा- जित होते हों । वे सन् भी आपके जीवन में उत्तम रहने चाहिए जो तीन से विभाजित होते हों।
विशेष – आपके टेलीफोन, मोटर, वाहन, मकान, आदि के नंबर भी ३ या ३ से विभाजित होने वाले हों तो ज्यादा श्रेष्ठ रहेंगे, भूल- कर भी ७ से कटने वाले अंकों का वाहन न लें ।
३ अंक के मित्र ६ तथा ε भी हैं।
उल्लेखनीय व्यक्तित्व—संसार के वे सारे प्रमुख एवं उल्लेखनीय व्यक्ति, जिनका मूलांक ३ रहा है।
जन्म
जॉर्ज ४ १२ अगस्त
डीन स्विफ्ट ३० नवंबर
वाल्टेयर २१ नवंबर
मैक्डोनाल्ड १२ अक्टूबर
जगदीशचंद्र बासु ३० नवंबर
डॉ नारायण दत्त श्रीमाली २१ अप्रैल
रूजवेल्ट ३० जनवरी
जनरल सैम मानिकशॉ ३ अप्रैल
स्टालिन
हेनरी फोर्ड
डॉ राजेंद्र प्रसाद
स्वामी विवेकानंद
ऋषिकेश मुखर्जी ( डायरेक्टर )
प्राण