मूलांक २ का प्रतिनिधि ग्रह चन्द्रमा है, जो कि भावुक, कोमल, कल्पनाप्रिय एवं मधुर है, फलस्वरूप इस मूलांक से संबंधित व्यक्ति भी सहृदय, कल्पनाप्रिय एवं मधुरभाषी होता है । ‘चन्द्रमा मनसो जात:’ के अनुसार चंचलमना होने से अधिक समय तक एक ही विषय पर स्थि- रता नहीं रहती और न एक ही कार्य को लम्बे समय तक कर पाते हैं । इन्हें नित्य नये-नये विचार सूझते हैं और नई से नई कल्पनाएँ मन में जन्म लेती रहती हैं ।
दो मूलांक वाले व्यक्ति शारीरिक रूप से अधिक प्रबल नहीं होते, परन्तु मानसिक रूप से ये अधिक स्वस्थ और सबल होते हैं, फलस्वरूप मज़दूरी एवं श्रम की अपेक्षा दिमागी कार्यों में ये अधिक योग्य सिद्ध होते हैं ।
स्वभाव से शंकालु और सदैव दूसरों का हित सम्पादन करते रहते हैं । ‘ना’ कहना आपके वश की बात नहीं, प्रत्येक कार्य या सुझाव में ‘हाँ’ ही आपकी ज़बान पर रहता है । स्वभाव से कोमल होने के कारण आप दूसरों पर दयालु भी रहते हैं ।
सौन्दर्य के प्रति श्रापकी रुचि परिष्कृत है । प्रेम और सौन्दर्य के क्षेत्र में श्राप महारथी हैं. दूसरों को सम्मोहित करने की कला आापको धाती है और चुटकियों में ही अपरिचित से अपरिचित व्यक्ति को भी
परिचित बना लेते हैं। अपनी गलती स्वीकार करने में भी आप हिच- किनाते नहीं । आत्मविश्वास की कमी होने से भी कई बार उधेड़बुन में ग्रस्त रहते हैं और क्षण-क्षण में आपके विचारों में परिवर्तन होते रहते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि आपके सरल एवं सहृदय होने के कारण दूसरे लोग श्रापका गलत उपयोग करते हैं। यद्यपि आप यह जानते हैं कि सामने वाला व्यक्ति चापलूसी करके अपना उल्लू सीधा कर रहा है, परन्तु फिर भी श्राप चुप रहते हैं ।
अधिक कल्पनाशील होने के कारण परिवार से भी यदाकदा जली- कटी सुनने को मिलती है तथा मानसिक संघर्ष बना रहता है, पर फिर भी प्राप इससे बच नहीं सकते । अधैर्य के कारण आप गलत-सही कुछ मी कर तो डालते हैं, परन्तु फिर भ्राप पछताते रहते हैं। निराशा और हीनता की भावना भी आपमें बढ़ी चढ़ी होती है जिसके कारण उदासी, गमगीनी प्रादि विचार भी बने रहते हैं। यद्यपि जीवन में मित्रों की संख्या अधिक होगी तथापि उनसे कोई विशेष लाभ हो, यह संभव नहीं है। वास्तविक मित्रों का अभाव आपको सदैव खटकता ही रहेगा, क्यों कि बिना मित्रों के आप एक क्षण भी नहीं रह सकते । आपको हर समय किसी न किसी की संगति चाहिए जबकि इसी कारण आपका कार्य शिथिल पड़ा रहता है।
चन्द्र तत्व प्रधान होने के कारण आपके स्वभाव और व्यवहार में स्त्रीत्व की मात्रा विशेष रहेगी। स्त्रियों के मामले में आप सौभाग्य- शाली रहेंगे, स्त्रियाँ सहज ही आपका विश्वास कर लेंगी तथा उनसे परिचय भी भाप अन्य की अपेक्षा जल्दी बढ़ा लेंगे । स्त्रियों से काम निकालने और उनसे राज उगलवाने में भी आप सिद्धहस्त माने जा मकते हैं ।
दूसरों के हृदय की बात जान लेने का आपमें सहज गुण है। सामने वाला व्यक्ति कहे या न कहे, आप तुरन्त ही उसके मन तक पहुँच कर उसकी चाह ले सकते हैं । ललित कलाभों में रुचि रखने के कारण आपका काफी समय, शक्ति और श्रम व्यर्थ ही जायेगा । अपनी पत्नी
प्रति भाप विश्वासी रहेंगे तथा सुन्दर एवं शिक्षित पत्नी के पति कह- लाने का गौरव प्राप्त करेंगे ।
नदी, समुद्र या जलतटीय नगरों में भापका भाग्योदय हो सकता है । ऐसे कार्य जिनमें यात्राएँ करनी होती हैं, यदि आपको सुलभ हों तो श्राप उनमें अच्छा लाभ उठा सकेंगे ।
सावधानियाँ – यद्यपि श्राप सभ्य, समझदार, सुशील एवं सतर्क व्यक्तित्व सम्पन्न पुरुष हैं, फिर भी कुछ तथ्य ऐसे हैं, जिनसे बचे रहें तो श्रापका जीवन अधिक उन्नत, अधिक माशाप्रद और अधिक श्रेष्ठ हो सकता है ।
१. आत्मविश्वास रखिये, ज़रा-ज़रा सी बात पर घबरा जाना, या हीन भाव से ग्रस्त होना श्रापको शोभा नहीं देता ।
२. जो भी कार्य प्रारम्भ करें, उसे पूरा करने का प्रयत्न करें । काम को बीच में ही या अधूरा छोड़ देना आपके व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं । जो भी विचार बनावें, उस पर दृढ़ता से जमे रहें ।
३. प्रेम के मामले में सँभल-संभल कर पाँव उठावें, क्योंकि उता- वली में आप सब किया-कराया बिगाड़ देते हैं। समाज में बदनाम भी हो सकते हैं।
४. जल्दबाजी मत कीजिये । कैसा भी संकट आ जाय, आप स्थिर चित्त से उस पर मनन कीजिये, श्राप स्वयं देखेंगे कि कोई राह निकल रही है ।
५. फालतू और चापलूस मित्रों की संख्या मत बढ़ाइये, ये आपके हितैषी नहीं ।
६. स्त्रियों में न तो अधिक बैठें और न उनसे घनिष्ठता ही बढ़ायें, क्योंकि इससे आपके व्यक्तित्व में न्यूनता ही श्राती है, श्रेष्ठता नहीं । ७. पूर्णिमा के दिन कोई निर्णय मत लीजिये और न गहरे जल में ही जाइये । आपके लिये शुक्ल पक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष अधिक अनुकूल है ।
८. आकाश में जब चन्द्रमा क्षीण हो या सूर्य के आसपास हो तब
प्राप किसी भी प्रकार का निर्णय न लें।
६. श्रौरतों की तरह ठुमक कर चलना, चप्पल घसीटते हुए चलना या हल्की मुस्कराहट बिखेरते हुए बात करना श्रापके व्यक्तित्व के लिए
ठीक नहीं ।
बीमारियाँ – भावुक तथा संवेदनाप्रधान व्यक्तित्व के कारण छोटी से छोटी घटना, परिस्थिति एवं वातावरण का भी आपके मन पर प्रभाव पड़ेगा, इसलिए हृदय से सम्बन्धित बीमारियाँ होने का भय बना रहेगा।
२. स्नायु-सम्बन्धी बीमारियाँ यदा-कदा बनी ही रहेंगी ।
३. पेट (श्रामाशय) से सम्बन्धित बीमारियाँ लगातार बनी रहेंगी। श्रजीर्ण, उदर रोग, कोष्ठबद्धता, श्राँतों के रोग, ‘गैस ट्रबल’ श्रादि बीमारियों से आप परेशान रह सकत हैं ।
४. जलोदर अथवा ऐसे ही किसी उदर रोग से आपकी मृत्यु सम्भव है ।
५. आपको चाहिये कि आप छूआछूत का पूरा ध्यान रक्खें । सावधानियाँ – १. ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे आपके स्नायु- संस्थान पर असर पड़ता हो ।
२. न तो बीमार के सम्पर्क में आयें और न ही बीमारी के प्रति लापरवाही बरतें ।
३. चेचक का टीका प्रति छः माह में एक बार अवश्य लगवा लिया करें ।
४. यदि आप दुर्बल हों तो अधिक क्रोध न करें, क्योंकि इससे मूर्च्छा, बेहोशी, शून्यता श्रादि बीमारियों का भय हो सकता है।
५. जब-जब भी आकाश में चन्द्रमा दुर्बल होगा, आपको स्नायु, खाँसी, फेफड़े के रोग श्रादि प्रबल होंगे, अतः ऐसी स्थिति में जाग-
रूकता बरतें ।
६. प्रतिदिन टहलें ।
७. अधिक विचार न करें और न उन्मादपूर्ण स्थिति में ही रहें। ८. कोई कार्य, विचार या प्रयत्न ऐसा न करें, जिससे आपका
मानसिक बोझ बढ़े ।
निर्बल समय – जब-जब भी चन्द्रमा सूर्य के नक्षत्रों- कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा पर होगा या सिंह राशि में विचरण करेगा अथवा सूर्य के साथ होगा, वह समय आपकी अस्वस्थता और मानसिक परेशानी को बढ़ाने वाला होगा। जनवरी, फरवरी और दिसम्बर महीने भी आपके लिए श्रेष्ठ नहीं कहे जा सकते ।
उन्नत समय – २० जून से २७ जुलाई तक गगनमण्डल में चन्द्रमा की स्थिति अधिक अनुकूल होती है, अतः इस समय में यात्रा, मुहूर्त शुभ कार्यों का प्रारम्भ श्रापके लिए श्रेयस्कर रहेगा, यह समय सिद्धिदायक है ।
शुभ तिथियाँ — किसी भी महीने की २, ११, २० और २६ तारीख अन्य तारीखों की अपेक्षा अधिक शुभ एवं सफलतापूर्ण हैं, इसके अतिरिक्त १, ४, ७, १०, १३, १६, १६, २२ और २५ तारीख भी मध्यम- रूपेण ठीक कही जा सकती हैं। शुभ तारीखों तथा शुभ समय को विचार कर किया गया कार्य निश्चय ही सफलतापूर्ण होता है।
शुभ दिवस-सप्ताह के सात वारों में सोमवार आपके लिये सर्वाधिक शुभ है। पूर्णिमा तथा प्रदोष का व्रत आपकी चिताओं को दूर करने वाला एवं कल्याणकारी है ।
शुभ रंग – हल्के हरे रंग आपकी मानसिक शक्ति बढ़ाने वाले हैं। शुभ्र सफेद वस्त्र कांति तथा पराक्रमवर्धक हैं, अंगूरी रंग आपकी स्नायविक उन्नति एवं श्रेष्ठता के लिए उपयोगी है। सफेद रंग का रूमाल आपको सदैव ही अपने पास रखना चाहिये । काला, बैगनी, नीला तथा हरा रंग प्रशुभ, कष्टदायक तथा पीड़ायुक्त कहे गये हैं ।
शुभ रत्न– आपका प्रधान रत्न मोती है, जिसे संस्कृत में ‘मुक्तक’ अंग्रेज़ी में पर्ल (pearl) तथा फारसी में ‘मोतिश कहते हैं । प्रापसे सम्बन्धित धातु चाँदी है, ग्रतः चाँदी की अँगूठी में ही मोती को धारण करना आपके लिये उन्नतिकारक है । मोती हमेशा चिकना, निर्मल, कांतियुक्त, कोमल और सुडौल लेना चाहिए तथा जहाँ तक सम्भव हो
सके ‘बसरे’ की खाड़ी का शुद्ध मोती ही प्रयोग में लाना चाहिए। मना- •मिका उँगली में मोती की अंगूठी धारण करें। बीमारी की अवस्था में रजत-पात्र में पानी पीने तथा उसका प्रयोग करने से शीघ्र लाभ होगा।
देवता -प्रापका प्रधान देवता ‘शंकर’ है, अतः आप शिव अथवा शंकर का इष्ट रक्खें एवं नित्य उनका दर्शन कर फिर भोजन करें। यदि यह भी सम्भव न हो तो मुक्तक जड़ी अँगूठी के ही दर्शन कर नित्य कार्य प्रारम्भ करें। अपने घर में शिव की सुन्दर मूर्ति या शिव का चित्र अवश्य रक्खें ।
ध्यान – प्रातःकाल उठकर श्राप शंकर का ध्यान करें। मन में शिव की मूर्ति प्रतिष्ठित करें तथा फिर यह ध्यान पढ़ें-
शंख प्रभं वेणु प्रियं प्रियं शशांक
मीशान मौलिस्थित मीड्य रूपम् ।
तमीवति चातृत सिक्त गात्र’
ध्याययेद् हृदब्जे शशिभं ग्रहेन्दम् ॥
मंत्र – आप जब भी चित्त में व्याकुलता अनुभव करें या विपरीत कार्य हो रहा हो अथवा अनिष्ट हो रहा तो तो आप निम्न मंत्र का जप करें, निश्चय ही आप अनुकूल स्थिति में अपने आप को देखेंगे ।
॥ ॐ श्रीं क्रीं चं चन्द्राय नमः ॥
मित्रता – जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों का जन्म २, ११, २० तथा २१ तारीखों को हुआ है, अर्थात् जिनका मूलांक २ है, वे आपके अच्छे मित्र सिद्ध हो सकते हैं, इस प्रकार के लोगों से आप फायदा भी उठा सकते हैं । सम्बन्ध, परिणय, स्नेह, भागीदारी, रोजगार आदि में यदि ऐसे लोगों का सहयोग लिया जाय तो आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं । रोमांस- जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों का जन्म २० जून से २७ जुलाई के बीच हुआ है एवं उनका मूलांक भी दो है, वे आपके रहस्य एवं राज में भागीदार हो सकते हैं तथा उनसे आपका सम्बन्ध मधुर एवं
सुखकर बना रह सकता है ।
शुभ वर्ष – आपके जीवन कां १०, १, १६. तथा २८ वर्ष श्रेयष्कर रहा होगा, इसी प्रकार ३७, ४६, ५५ तथा ६४वाँ वर्ष भी उन्नतिदायक होगा । ४, १३, २२, ३१, ३५, ४०, ४४, ५३, ६२ तथा ७१वाँ वर्ष भी प्रगतिपूर्ण कहे जा सकते हैं ।
७ का अंक भी दो मूलांक का मित्र कहा जाता है, भ्रतः ७, १६, २५, ३४, ४३, ५२ तथा ६१वाँ वर्ष भी श्रेष्ठ रहने चाहियें ।
२, ११, २०, २६, ३८, ४७, ५६, ६५, ७४ तथा ८३वीं वर्ष भ्रापके लिये सर्वोत्तम वर्ष सिद्ध होंगे ।
अशुभ तिथियाँ– ५, १४, २३ ।
अशुभ वर्ष – ५, १४, २३, ३२, ४१, ५०, ५६, ६८ तथा ७७ वाँ वर्ष सामान्य तथा कष्टकर होंगे ।
उपर्युक्त तारीखों तथा वर्षों का गहराई से अध्ययन कर निष्कर्ष निकालें ।
उल्लेखनीय व्यक्तित्व – संसार के वे प्रमुख एवं उल्लेखनीय व्यक्ति जिनका मूलांक २ रहा है ।
१. स्वीडनवर्ग
२. मेरिया एन्टोनी
३. ग्लेडस्टन
जन्म
२६ जनवरी
मूलांक २
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२ नवम्बर
२६ दिसम्बर
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99
४. सादी करनोट
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११ अगस्त
19
५. नेपोलियन III
33
19
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६. एडिसन
७. इब्सन
८. चार्ल्स II
६. थोमस हार्डी १०. श्रदम्स राष्ट्रपति
११. प्रेसिडेंट हार्डिंग
१२. जोसेफ जेफरसन
१३. दिलीपकुमार (अभिनेता) १४. सर श्राशुतोष मुकर्जी
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11
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27
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99
२० अप्रैल
११ फरवरी
२०
२६
मार्च
मई
२ जून
११ जुलाई
२ नवम्बर
२० फरवरी
११ दिसम्बर
२६ जून
36
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२
19
२
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२
11
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19
17
२
१५. मोरारजी देसाई
१६. सुमित्रानन्दन पन्त
१७. हेरॉल्ड विल्सन
१८. हर हिटलर
11
२६ फरवरी
11
39
२० मई
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११ मार्च
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२० अप्रैल
S
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२
२
२
२
१६. महात्मा गाँधी २०. मुसोलिनी
२१. लालबहादुर शास्त्री
२२. जनरल बी. एम. कोल
२३. मुहम्मद साहब
19
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२ अक्तूबर
२६ जुलाई
२ अक्तूबर
21
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२ मई
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२० अप्रैल
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२
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२४.
मथुरादास माथुर
“
२० सितम्बर
11
२
२५.
आशा पारीख
39
11
२६. माला सिन्हा
33
२ अक्तूबर
११ नवम्बर
२
“
२
२७.
राम महेश्वरी (निर्माता)
33
२० फरवरी
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