प्रतिनिधि ग्रह – जिन व्यक्तियों का जन्म १, १०, १६ या २८ तारीख को होता है, उनका मूलांक १ तथा प्रतिनिधि ग्रह सूर्य होता है। सूर्य चूंकि समस्त ग्रहों का अधिपति होता है तथा ग्रहों में प्रधान होता है, श्रतएव एक मूलांक भी सभी अंकों में प्रधान और श्रेष्ठ गिना गया है। एक मूलांक वाले व्यक्ति तेजस्वी, साहसी, कर्मठ, निरन्तर उद्योग में रत एवं परिश्रमी होते हैं। आकाश में जब-जब भी सूर्य प्रबल रहेगा, आपकी स्थिति प्रबल बनेगी, परन्तु सूर्य की क्षीणावस्था में आपका जीवन भी क्षीण होता दिखाई देगा ।
निर्बल समय– लगभग अक्तूबर, नबम्बर तथा दिसम्बर में सूर्य की किरणें इतनी तेजस्वी नहीं रहतीं, अतः यह समय आपके लिए अधिक अनुकूल नहीं होता। स्वास्थ्य में क्षीणता, कार्य में अनुत्साह और व्यर्थ की परेशानी तथा भाग-दौड़ इस समय में देखी जा सकती है।
उन्नत समय – आकाश मण्डल में सूर्य की प्रबल स्थिति ही प्राप के जीवन की प्रबल स्थिति मानी जानी चाहिए। इस दृष्टि से २१ मार्च से २८ अप्रैल तथा १० जुलाई से २० अगस्त तक सूर्यं प्रखर एवं तेजस्वी रहता है, अतः यह समय आपके लिए श्रेष्ठ, उन्नत एवं प्रभाव- शाली माना जा सकता है।
शुभ तिथियाँ– वे सभी व्यक्ति या स्त्रियां जिनका जन्म १, १०, १६, २८ तारीखों में हुआ है, आपके लिए सहायक एवं सुविधापूर्ण होंगे । ये तारीखें आपके जीवन में भी मोड़ देने वाली हैं, अतः आप यदि कोई कार्य इन तारीखों को ही प्रारम्भ करें तो अधिक सुविधापूर्ण एवं शीघ्र सफल होगा। अपने से उच्च अधिकारी से मिलने जाना या पत्र लिखना अथवा किसी से मिलना, कोई नया कार्य या व्यापार आदि इन्हीं तारीखों में प्रारम्भ करना चाहिए, जिससे शीघ्र सफलता मिल सके ।
शुभ दिवस – प्रत्येक सप्ताह का रविवार या सोमवार श्रापके लिए शुभ फलदायक है। यदि आपकी अनुकूल तारीखों में से ही किसी तारीख को रवि या सोमवार पड़ रहा हो तो वह दिन श्रापके लिए अधिक अनुकूल और श्रेष्ठ फलदायक होगा ।
शुभ रंग– अधिक अनुकूल रंग पीला या ताम्रवर्ण है। पीला भी पूर्णतः पीला नहीं, श्रपितु सुनहरा पीला होना चाहिए। आपको चाहिए कि यथासम्भव ड्राइंग रूम के पर्दे, तकिये की खोली, बिछावन श्रादि इसी रंग के हों। अपने पास इस रंग का रूमाल तो आप हर समय रक्खें । स्वास्थ्य की क्षीणता के समय भी आपको चाहिए कि आप इसी रंग के वस्त्र पहनें ।
शुभ रत्न– श्रापका प्रधान रत्न माणिक है, जिसे संस्कृत में
पद्म-राग, फारसी में याकूत, उर्दू में चुन्नी और अँग्रेज़ी में रूबी कहते हैं। शुभ मुहूर्त में सोने की अँगूठी में लगभग पाँच रत्ती का माणिक इस प्रकार से जड़वाएँ कि वह अनामिका उँगली को स्पर्श करता रहे। रविवार को ही यह रत्न जड़वायें और उसी दिन पहन लें ।
देवता – आप सूर्योपासना करें तथा उगते हुए सूर्य का दर्शन करने के पश्चात् ही नित्य के कार्यों में संलग्न हों। यदि यह संभव न हो तो माणिक जड़ी स्वर्ण अँगूठी के ही दर्शन कर लें ।
ध्यान- प्रातःकाल उठकर आप सूर्य का ध्यान करें, मन में सूर्य की मूर्ति प्रतिष्ठित करें और तत्पश्चात् निम्न मंत्र का पाठ करें- प्रत्यक्ष देवं विशदं सहस्त्र मरीचिभिः शोभित भूमि देशम् । सप्ताश्वगं सस्वज हस्तमाद्यं देवं भजेऽहं मिहिरं हृदब्जे ।।
मंत्र – श्रापका चित्त जब भी व्याकुल हो, घबराहट हो, किसी भी प्रकार की परेशानी या संकट हो तो आप निम्न मंत्र को १०८ बार पढ़ लें, श्राप कार्य सिद्धि का प्रत्यक्ष फल स्वयं देख सकेंगे ।
॥ ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ॥
शारीरिक स्वास्थ्य तथा बीमारियाँ – श्राप हृदयपक्ष से कमजोरी महसूस करेंगे तथा हृदय-संबंधी कोई न कोई कष्ट आपको बना रहेगा । रक्त-संबंधी बीमारियाँ भी यदाकदा होंगी तथा उससे पीड़ित रहेंगे । वृद्धावस्था में रक्त चाप, ‘हार्टअटैक’ तथा नेत्र- पीड़ा जैसे रोग यदाकदा होते रहेंगे । आप रक्त की शुद्धता एवं सहज प्रवहता की ओर विशेष ध्यान देते रहें ।
व्रतोपवास– यदि संभव हो सके तो श्राप रविवार को भूखे रहें या एक समय भोजन करें। यदि भोजन के साथ नमक का सेवन न करें तो यह विशेष लाभदायक रहेगा। इसी दिन भोजन करने से पूर्व सुगंधित अगरबत्ती जलाकर ‘आदित्य हृदय’ कवच का पाठ करें तो थाप स्वयं अनुभव करेंगे कि आप कई बाधाओं से मुक्त हो रहे हैं तथा बीमारियाँ भाप से दूर ही रहती हैं।
मित्रता – जिन लोगों का जन्म १, १०, १६ और २८ तारीखों को अथवा १० जुलाई से २० अगस्त तथा २२मार्च से २८ अप्रैल के बीच हुआ है, वे व्यक्ति आपके लिए अधिक अनुकूल, सहयोगी एवं विश्वास- पात्र सिद्ध होंगे । इस प्रकार के लोगों से श्रापकी मित्रता टिकाऊ रहेगी तथा व्यवसाय, रोज़गार, साझेदारी आदि में भी ये व्यक्ति सहायक सिद्ध होंगे।
रोमांस – जिनका मूलांक १, ४ या ७ है, वे श्रापके लिये अच्छे साथी सिद्ध हो सकते हैं । उपर्युक्त मूलांक वाले व्यक्तियों से श्राप सहज ही प्रेम संबंध स्थापित कर सकते हैं तथा उसमें सफल भी हो सकते हैं।
आपकी विशेषताएँ – १. आपकी सहनशक्ति उत्तमकोटि की है। जीवन में आपको भयंकर उथल-पुथल देखनी पड़ी है तथा असंगतियों एवं विपरीत परिस्थितियों से श्राप निरन्तर संघर्ष करते रहे हैं, परन्तु इतना होने पर भी आप में साहस की कमी नहीं और न किसी प्रकार की दुर्बलता ही आई । जीवनी-शक्ति जितनी आप में है, उतनी अन्य लोगों में कम हो पाई जाती है ।
२. नेतृत्व करने की प्रवृत्ति आप में प्रबल है । बचपन में साथियों तथा हमजोलियों का नेतृत्व तथा बड़े होने पर अपने मित्रों तथा संबंधियों का नेतृत्व आप करते ही रहे हैं। यह गुण आप में जन्मजात है ।
३. परिचय क्षेत्र विस्तृत होगा, किसी भी अपरिचित व्यक्ति को परिचित बना लेना तथा थोड़े ही दिनों में उससे मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित कर लेना आपकी विशेषता है। समाज में भी आपको कई लोग जानेंगे तथा आपके कार्यों एवं गुणों की प्रशंसा करेंगे ।
४. जिन व्यक्तियों का मूलांक एक होता है, वे हर समय नवीनता की खोज में रहते हैं। कुछ न कुछ नया, विलक्षण, अलौकिक कार्य करना इनकी खूबी है । ऐसे ही व्यक्ति संसार को कुछ नई चीज़ दे जाते हैं ।
५. आपकी शारीरिक संरचना प्रबल एवं सुदृढ़ है, जिससे शारी- रिक रूप से भी कार्य करने में श्राप सक्षम हैं तथा जीवन में हिम्मत नहीं हारते ।
६. व्यापार में आप अगुना रहेंगे । आपके व्यापार की सफलता आपकी दूरदर्शिता ही है जिसके कारण कम ही समय में काफी प्रगति कर सकेंगे। यदि आप नौकरी करते हैं तो शीघ्र ही उच्चपदाधिकारी बनेंगे तथा आपके नेतृत्व में कई लोग कार्य करेंगे । चाहे व्यापारिक कार्य हो, चाहे सामाजिक, आपका नेतृत्व प्रमुख रहेगा ही ।
७. सबसे बड़ी जो विशेषता श्राप में है, वह है अपने सामने निश्चित लक्ष्य। आप अपने लक्ष्य के प्रति पूर्णतः सजग और सचेष्ट हैं और निरन्तर अपने लक्ष्य की ओर गतिशील हैं, अँधेरे में भटकने वाले व्यक्ति आप नहीं ।
८. एक मूलांक वाले व्यक्ति निर्णय लेने में भी चतुर होते हैं। अनिश्चय की स्थिति नहीं के बराबर होती है। किसी भी कार्य या व्यव- साय के बारे में तुरन्त निर्णय ले लेना आपके जीवन की सफलता है। और ऐसा निर्णय अधिकांशतः सही होता है ।
६. स्वतंत्र व्यक्तित्व, स्वतंत्र निर्णय और स्वतंत्र जीवन आपके लिये प्रधान रहा है, किसी की घौंस में जीवित रहने वाले आप नहीं, अपने विचारों के आप स्वयं निर्माता और अगुआ हैं ।
१०. पिटे-पिटाये तौर-तरीकों से आप प्रसन्न नहीं। किसी भी कार्य में नवीनता का मिश्रण आपकी विशेषता रहेगी। कार्यालय में भी श्राप नवीन पद्धति से काम लेंगे। मौलिकता आपके मस्तिष्क की प्रधान विशेषता है ।
११. जो निर्णय ले लिया, वह ले लिया, आप उस पर अटल और अडिग हैं, ज़रा-ज़रा-सी बात में निर्धारित नीति बदलना आपके स्वभाव में नहीं और इसीलिए समाज की दृष्टि में आप विश्वासी हैं, कार्य निष्ठ हैं, सही और सच्चे हैं ।
१२. महत्वाकांक्षा की उग्रता श्राप में रहेगी। आपका मस्तिष्क हर समय इसी ओर क्रियाशील रहेगा कि किस प्रकार मैं अपना अभ्यु- त्थान कर सकता हूँ, ऊँचा उठ सकता हूँ, आगे बढ़ सकता हूँ और इस- लिये कभी-कभी झुंझलाहट, खीझ, मानसिक अस्तव्यस्तता भी आ सकती है, पर थोड़े समय के लिये ही, क्योंकि श्राप तुरन्त सिर झटककर बासी धौर निराशापूर्ण विचारों को दूर फेंक कर धागे के लिए सोचना शुरू कर देते हैं।
१३. आप अपने कार्य में कम से कम हस्तक्षप चाहते हैं। पाव नहीं चाहते कि जरा-जरा-सी बात पर आपको कोई टोकता रहे या बिना माँगे ही सुझाव दे । श्राप शांति चाहते हैं धौर सही मार्ग पर आगे बढ़ते रहना ही आपको पसन्द है ।
१४. यदि कहा जाय कि नई से नई सूझ, विचारों तथा योज- नाओं के लिए आपका मस्तिष्क उर्वर है तो इसमें कोई अत्युक्ति नहीं। आप एक सफल ‘प्लानर’ बन सकते हैं, नये से नये एवं श्रेष्ठ लोगों से आपका सम्पर्क बना रहेगा, बढ़ता रहेगा।
१५. द्रव्य कमाने में बाप जितने परिश्रमी हैं, उतने ही व्यय करने में उदार भी। पैसा आपके पास कम ही टिक पाता है। हृदय से आप संकुचित और संकीर्ण नहीं, जहाँ जैसी आवश्यकता अनुभव करते हैं. तुरन्त व्यय कर डालते हैं।
१६. सुन्दर, सलीकेदार एवं सुरुचिपूर्ण जीवन से आपको प्रेम है। अस्तव्यस्तता, फूहड़पन व शिथिलता आपको पसन्द नहीं । स्त्री भी आपको लगभग अापके विचारों के अनुकूल ही प्राप्त होगी। श्राप कला- सौन्दर्य पारखी और प्रशंसक होंगे।
१७. चाटुकारिता, झूठी प्रशंसा आदि से आपको घृणा होगी। स्पष्ट धौर दो टूक, परन्तु समय और स्थान का विचार कर बात कहना प्रापकी विशेषता कही जा सकती है।
१८. आपको ग्राकस्मिक लाभ-व्यय होते ही रहेंगे। तात्पर्य यह कि आपके जीवन में आकस्मिकता का प्राधान्य रहेगा। आमदनी प्रथवा द्रव्य लाभ होगा तो अचानक और आकस्मिक रूप से ही होगा, इसी प्रकार खर्चे भी ग्राकस्मिक रूप से ही घ्रायेंगे । कभी-कभी ऐसी स्थिति भी ग्रा सकती है कि बजट असन्तुलित हो जाय, परन्तु शीघ्र ही धाप उसे व्यवस्थित कर लेंगे।
१९. प्रापका व्यक्तित्व प्रभावशाली होगा, फलस्वरूप कई कार्य तो आपके व्यक्तित्व के फलस्वरूप ही संभव हो जायेंगे। प्रापका व्यक्तित्व ही आपकी सफलता का हेतु है।
२०. आप इसी प्रकार के कार्य या व्यवसाय में सिद्धि प्राप्त करेंगे, जो त्वरित निर्णय सम्पन्न हो, जिसमें शिथिलता न हो एवं जिसमें बुद्धि का प्रयोग होता हो ।
२१. आप स्वभाव से ही चतुर, हँसमुख एवं श्राकर्षणप्रधान होंगे। दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करने का आप में प्रधान गुण होगा ।
सावधानियाँ – १. कभी-कभी आप शान-शौकत दिखाने के लिए जरूरत से ज्यादा व्यय कर डालते हैं, यह ठीक नहीं । आपके बजट असन्तुलन का कारण यही है ।
२. कभी निरंकुशता हद से ज्यादा बढ़ जाती है और यह निरं- कुशता आपके लए खतरे की सूचक हो जाती है।
३. आप जोखिम उठावें, पर धन संबंधी मामलों में आप जोखिम न उठावें, इससे आप परेशानी में पड़ सकते हैं ।
४. हद से ज्यादा किसी पर विश्वास भी न करें, मित्रों की ओर से धन संबंधी धोखा मिलेगा, सावधान रहें ।
५. सौन्दर्य और स्त्री की श्रासक्ति आप पर लांछन भी ला सकती है, अतः बहुत संभल कर धीरे-धीरे ही आगे बढ़ें।
शुभ तिथियाँ– १, ४, १०, १३, १६, २२, २८ और ३१ । शुभ वर्ष – १, १०, १६, २८, ३७, ४६, ५५, ६४, व ७३वाँ वर्ष । आपके जीवन के उल्लेखनीय वर्ष होंगे ।
उपरोक्त वर्षों का जोड़ एक है, अतः आपके जीवन के वे सभी वर्ष जिनका योग एक है, आपके जीवन को उन्नत मोड़ देने वाले एवं श्रेष्ठ सिद्ध होंगे ।
अशुभ तिथियाँ– ७, १६, २५
अशुभ वर्ष – ७, १६, २५, ३४, ४३, ५२, ६१, ७० आदि वे सभी वर्ष जिनका योग सात होता है, श्रापके लिए अनुकूल नहीं कहे जा सकते । श्रापको चाहिए कि आप अपने महत्त्वपूर्ण कार्य इन तारीखों में प्रारम्भ न करें।
उल्लेखनीय व्यक्तित्व-संसार के प्रमुख एवं उल्लेखनीय व्यक्ति जिनका मूलांक एक रहा है-
१. सिकन्दर महान् जन्म १ जुलाई मूलांक १
२. ड्यूक विलिंगटन ” १ मई
३. जनरल गोर्डन
४. राष्ट्रपति गारफ़ील्ड
५. डेविड लिविंगस्टोन
६. एनीबीसेन्ट
७. राष्ट्रपति विल्सन
८. राष्ट्रपति हूवर
37 श्ररविल राइट
२८ जनवरी
37
१
71
“
२६ नवम्बर
१
१६ मार्च
27
१
11
१ अक्टूबर
27
१
27
२८ दिसम्बर
37
१
11
22
१० अगस्त
१
६. श्ररविल राइट
21
१६ अगस्त
१
१०. बिस्मार्क
“1
१ अप्रैल
17
१
११. केप्टन कुक
11
२८ अक्तूबर
१
१२. दाँते
11
२८ अक्तूबर
१
१३. गोथे
“
२८ अगस्त
१
१४. मजरूह सुलतानपुरी
१५. मीनाकुमारी
१ अक्तूबर
१
27
१६. राजेन्द्रसिंह बेदी
१ अगस्त
१
27
१ सितम्बर
१
१७. लता मंगेशकर
22
१८. सम्पूर्णानन्द
२८ सितम्बर
१
27
१
१ जनवरी